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कानूनी अधिकार जो आपको पता होने चाहिए

 ऐसे कानून जो आपको पता होने चाहिए.



                     अधिकार एक ऐसी चीज है जो सिर्फ मांगने पर ही मिल सकती है, माँगा तब जाता है जब हमें मालूम हो कि अमुक चीज हमारी है और उसपर हमारा हक़ है, बिना हक़ जताये कुछ भी नहीं मिलता, किसी अपनी पर चीज या अपने अधिकार जाताना जीवित मनुष्य की निशानी है,  याद रखिये कि रोये बिना मां भी दूध नहीं पिलाती, जो व्यक्ति अपने अधिकार को नहीं जानता उसका जीवित रहना या नहीं रहना कोई मायने नहीं रखता   हम एक स्वतंत्र देश में रहते हैं, हमारा देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, संविधान में लिखा है कि इस देश का संविधान जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए है, मतलब ये कि इस देश में जो कुछ भी है जनता का है, मतलब हमारा है, और जानकारी के आभाव में हम परेशानियों में पड़ते रहते हैं, आज हम कुछ कानूनी अधिकारों के बारे में  बता रहे हैं, जो भविष्य में आपके लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं...

 

गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार:- जब पुलिस आपको गिरफ्तार करे तो आपको सीआरपीसी सेक्शन 50, सब सेक्शन 1 के तहत आपको आपकी गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार है... पुलिस आपको बिना कारण गिरफ्तार करे तो आप मना कर सकते हैं, या आप अपने वकील से बात करने के बाद ही इस पर कोई निर्णय लेने के लिए कह सकते हैं....! बिना कारण के पुलिस आपको कभी भी गिरफ्तार नहीं कर सकती...!

महिला को कोई महिला पुलिस ही गिरफ्तार कर सकती है:-

सीआरपीसी के सेक्शन 46, सब सेक्शन 1 के तहत किसी महिला को कोई महिला पुलिस ही गिरफ्तार कर सकती है, अगर कोई पुरुष पुलिस गिरफ्तार करे या गिरफ्तार करने की कोशिश भी करे तो ये क्राइम है. आप उन्हें ऐसा करने से रोक सकते हैं.

 किसी भी महिला को रात में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता:- 

सीआरपीसी सेक्शन 46 सब सेक्शन 1 के तहत किसी भी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा जाएगा. अगर किसी महिला को पुलिस द्वारा रात में  गिरफ्तार किया जाता है, तो ये क्राइम है.

नॉन कॉग्निजेब्ल ऑफेंस के मामलों में वारंट देखने का अधिकार:- 

नॉन कोगनेजेबल ऑफेंस मतलब, किसी छोटे क्राइम जैसे किसी के साथ धोखधड़ी करना, ऐसे मामलों में पुलिस बिना किसी वारंट के गिरफ्तार नहीं कर सकती है. अगर नॉन कोग्नेजेबल के मामलों में पुलिस किसी को गिरफ्तार करने आती है तो आपको वारंट देखने का अधिकार है, बिना वारंट आप गिरफ्तारी देने से मना कर सकते हैं.

अरेस्ट मीमो बनवाने का अधिकार:- 

पुलिस जब आपको गिरफ्तार करके ले जाती है तो आपको सीआरपीसी सेक्शन 41b के तहत अपनी गिरफ्तारी का मीमो
बनवाने का अधिकार होता है, इस सेक्शन के तहत इस मेमोरेंडम ऑफ़ अरेस्ट में पुलिस को ये लिखना होता है कि पुलिस ने आपको कहां से, किस कारण से और कब गिरफ्तार किया... इस मेमोरेंडम में गिरफ्तार करने वाले अधिकारी की रैंक और मोहल्ले या गांव के किसी रेस्पेक्टेड आदमी के हस्ताक्षर करवाने होते हैं. इसी सेक्शन के तहत पुलिस को आपके घर पर सूचना देनी होती है...? अगर पुलिस द्वारा आपको कहीं बाहर से गिरफ्तार किया जाता है तो सीआरपीसी सेक्शन 50A के तहत आपके रिश्तेदार या परिवार को सूचना देवी ही होगी.

गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की सुरक्षा और स्वास्थ्य का ख्याल रखना:-

किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस को उस व्यक्ति की सीआरसीपी सेक्शन 55A के तहत उस व्यक्ति के स्वास्थ्य और सुरक्षा का ख्याल रखना जरूरी होता है. 

वकील से मिलने का अधिकार

गिरफ्तार करने के बाद इंटेरोगेशन के दौरान व्यक्ति को सीआरपीसी सेक्शन 41d के तहत अपने वकील से मिलने का अधिकार होता है. वकील से मिलने से पहले आप पुलिस को किसी भी सवाल का जवाब देने से मना कर सकते हैं. 

24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रखा जा सकता

पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने के बाद आपको सीआरपीसी सेक्शन 57 के तहत24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं
रखा जा सकता... अगर 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखा जाता है तो सीआरपीसी सेक्शन 167 के तहत मैजिस्ट्रेट से परमिशन लेनी होगी. 

मेडिकल जांच

गिरफ्तार करने के बाद आप सीआरपीसी सेक्शन 54 के तहत आप पुलिस से अपना मेडिकल टेस्ट करवाने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं, इसमें पुलिस से अपनी किसी भी समस्या के विषय में मेडिकल जांच करवाने के लिए कह सकते हैं, कोर्ट में पेश करने से पहले जब आप मेडिकल के लिए बोलेंगे तो उसका फायदा ये होगा कि पुलिस आपके साथ मारपीट नहीं करेगी...!

ये थे कुछ कानूनी अधिकार जो आपको हमेशा याद रखने चाहिए... ताकि आप पुलिस द्वारा बेवजह परेशान ना किए जाएं...!


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